सदन में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी की इंदौर यात्रा को लेकर भाजपा में घबराहट बेमानी थी। उसने बिना बात अड़ंगे डाल कर एक ओर इंदौर की आतिथ्य परंपरा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया, दूसरी तरफ जाहिर किया कि वो राहुल की यात्रा से बहुत भयभीत है। ऐसा नहीं करना चाहिए था। आजाद भारत में अपनी बात कहने का सबको अधिकार है, उसका हनन अनुचित है।
साथ ही बेफिक्र रहो… वो बच्चा बुद्धि है, अपने हाथ से ही पैर पर कुल्हाड़ी मार लेंगे। इतनी बड़ी संख्या में जेन-जी इनको इंदौर में मिले थे, उनके बीच अपनी बात प्रभावशाली ढंग से रखने के बजाय स्टैंडअप कॉमेडियन को मंच पर बुलाकर इन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक बनाया। ये विपक्ष के नेता हैं कि क्या हैं?
शालीनता से अपनी बात कहना चाहिए, जबकि इनके पास मोदीजी और अमित शाह के विरुद्ध ऐसे मुद्दे हैं जिससे ये लोगों को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन ये ऐनवक्त पर बच्चा बुद्धि दिखाकर सब चौपट कर देते हैं। आलू से सोना बनाने जैसे बेतुके भाषण देकर पहले ही खुद की छवि कॉमेडियन की बना रखी है।
इनको युवा नेता मानकर आशाएं लेकर बड़ी संख्या में युवा शक्ति इनकी ओर आकर्षित है, लेकिन ये अपनी लोकप्रियता पचा नहीं पा रहे हैं। पहले भी अपनी पदयात्रा में युवतियों के प्रति अतिरिक्त आकर्षण की वजह से ये चर्चा में रह चुके हैं। कभी संसद में मोदीजी के गले पड़ जाते हैं, लेकिन इंदौर वाले ताजा मामले में माताजी सोनिया गांधी को इन्हें थप्पड़ लगाना चाहिए। इतने बड़े समुदाय के बीच बच्चा बुद्धि का प्रदर्शन इन्होंने किया तथा उस कॉमेडियन की भी परेशानी बढ़ा दी जिसे मंच पर बुलाया था। भाजपा इनसे खामखां भयभीत है, ये तो खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने में माहिर हैं।