खरी (अ) खरी
सारा किस्सा भ्रष्टाचार का है, सड़कों के छोटे गड्ढे जहां कम भ्रष्टाचार की कहानी कहते हैं, वहीं बड़े गड्ढे भीषण भ्रष्टाचार के गवाह हैं।
स्मार्ट सिटी के नाम पर बनी सड़कें कहीं 6 फीट, कहीं 8 फीट तक धंस रही है, यह क्रम थमा नहीं है , और भी सड़कें धंसना बाकी है, जो बड़े भ्रष्टाचार की गवाह बनेगी , लेकिन जिस तरह धंसी हुई सड़कों पर लीपापोती की जा रही है उसी तर्ज पर जिम्मेदारों पर कार्यवाही के नाम पर भी लीपापोती हो रही है, वे बेशर्मो की तरह बयान देते हैं, और उन्हें मान भी लिया जाता है।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि गौराकुंड पर सड़क चौड़ीकरण में बाधक बने एक धार्मिक स्थल को क्षेत्रीय भाजपा नेता ने टूटने से बचा लिया है, यही हाल मल्हारगंज के धर्मस्थल का भी है , इन दोनों ही स्थानों पर पूरे समय जाम लगा रहता है, होना यह चाहिए कि जो नेता इन अतिक्रमणों को हटाने में बाधक बना उसे सड़क पर आकर यातायात व्यवस्था संभालना चाहिए, क्योंकि यातायात पुलिस इसमें पूरी तरह नाकाम है। कैसे लोग ऐसे बाधक तत्वों को माफ कर देते हैं, वो नेता तो अपने घर बैठा है, वो खुद वाहन चलाता भी नहीं, कहीं जाना होता है तो वाहन लेकर गुर्गों को बुला लेता है, घूम फिर कर वापस अपने घर लेकिन जनता परेशान हो रही है, बड़े गणपति से कृष्णपुरा तक का रोड चौड़ा हो गया लेकिन ये दो स्थान लगातार जाम से पीड़ित है, इसी गौराकुंड में गड्ढा धंसने की बात पर जिम्मेदार अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यहां अतिक्रमण की वजह से सड़क का निर्माण नहीं हुआ, और पुरानी सड़क धंसी है, उसकी हमारी जिम्मेदारी नहीं है, यह सिटी स्मार्ट बनी कि नहीं यह मत पूछिए, अधिकारी जरूर स्मार्ट हो गए हैं, इस शहर की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है वैसे ही सड़कों का और यातायात का समान रूप से कबाड़ा हुआ पड़ा है , और नेता अपनी नेतागिरी से बाज नहीं आ रहे भुगतना तो आम जनता को पड़ रहा है,
जो वाहन चालक लगातार जाम में फंसे हैं वाहन के हॉर्न बजाकर अपना विरोध प्रदर्शन करते हैं, लेकिन मदहोश अधिकारियों तक उनकी आवाज पहुंच नहीं पाती है।
-- दीपक शर्मा