जेनजी के बहाने सत्ता में आने का स्वप्न भूल जाओ राहुल गांधी, तुम्हारे रूप में उन्हें कुशल दिशा निर्देशक नहीं मिलने वाला। तुम्हारे भरोसे यदि ये रहे तो अपने हाथों स्वयं का सर्वनाश तय कर लेंगे। न चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला करके तुम्हें सत्ता का स्वप्न देखना चाहिए। समझ लो कि जिसके हाथ में ताकत (सत्ता) है, वो साम, दाम, दंड, भेद के जरिए अपना काम करता रहेगा। क्या तुम्हारी दादी ने सत्ता हाथ से जाते देख आपातकाल की घोषणा नहीं की थी, क्या 1974 में साधु-संतों पर अंधाधुंध गोलीबारी करने वाला तुम्हारा ही परिजन नहीं था।
जिस “इंडियन एक्सप्रेस” की खबर पर आप कूद रहे हो क्या तुम्हारे ही पापा ने बोफोर्स कांड इनके द्वारा उछाले जाने पर इनके यहां छापेबाजी नहीं करवाई थी? अपना उपनाम बदलकर तुम्हारी ही पार्टी आजादी के बाद से अल्पसंख्यकों को तोक कर फिर रही है। अपनी पार्टी तथा उसके नुमाइंदों के कारनामे देखो, देश को जब श्री अटल बिहारी वाजपेयी के रूप में शानदार शासक मिला तो उनकी सरकार एक वोट से गिरवा दी। कहां तक तुम्हारे पाप गिनाएं, जब तुम सत्ता में थे तो अपनी ताकत के बल पर उचित-अनुचित किया। अब उनकी सत्ता है तो उनसे केवल उचित की उम्मीद क्यों? मान क्यों नहीं लेते कि सत्ता पाना और उसे चलाना तुम्हारे बस की बात नहीं है।
नहीं है। तुम्हारे पास एक समय जो मंजे हुए नेताओं की फौज थी वो भी लगभग खत्म हो चुकी है। तुम सत्ता चला नहीं सकते। केवल सरदार मनमोहन सिंह जी जैसे शासकों की गर्दन पर हाथ रख सकते हो। ऐसे मंजे हुए नेता की बेइज्जती में तुमने और तुम्हारी मम्मी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। परिवारवाद के चक्कर में अपनी पार्टी और स्वयं की दुर्दशा के बाद सहारे के लिए तुम जैन जी और ज्ञानेश कुमार जैसे तिनके ढूंढ रहे हो, लेकिन ये तुम्हें तेरा नहीं पाएंगे। आत्मावलोकन करो, तुम्हारी पार्टी ने देश का कितना नुकसान किया है। वर्तमान परिस्थितियों में सत्ता चलाने में जो कठिनाइयां हैं क्या उस पर खरा उतर पाओगे? अपनी ही पार्टी के किसी अच्छे नेता को आगे लाओ (अगर तुम्हारी नजर में हो)?