केवल कहने मात्र से नहीं चल जाएगा कि मेरा अपने भाई से कोई संबंध नहीं, पूरी दुनिया ही मेरा परिवार है। बागेश्वर धाम वाले पं. धीरेंद्र शास्त्री पूरी दुनिया को सुधारने के लिए ज्ञान बांटते फिरते हैं। पर्चे निकालकर लोगों की समस्याएं सुलझाने का दावा करते हैं, लेकिन खुद का घर संभल नहीं रहा। छोटे भाई शालिग्राम ने कोंडा गांव में जमीन हथियाने के लिए गोली चलाई है। कानून तो अपना काम करेगा, लेकिन सवाल यह है कि शास्त्री अपने ही घर में गुंडागर्दी को प्रश्रय दे रहे हैं। वे यदि कहते हैं कि मेरा उससे कोई संबंध नहीं है तो उसे बागेश्वर धाम में अवैध पार्किंग संचालित करने की अनुमति क्यों दे रखी थी..? सब जानते हैं कि शास्त्री की लोकप्रियता का फायदा न केवल उनका भाई, बल्कि पूरा परिवार ही उठा रहा है। इनको धन की कोई कमी नहीं है, फिर दूसरे की जमीन हथियाने क्यों गए..? क्या इन्हें लगता है कि इनका भाई प्रभावशाली है तो ये अपराध करके भी बच जाएंगे..?
मुद्दा ये है कि अपने प्रवचनों के माध्यम से समाज का सुधार करने निकले पं. शास्त्री लोगों की समस्याएं सुलझाने के लिए पर्चे निकालते हैं, लेकिन खुद के परिवार की समस्या सुलझ नहीं रही। जरूरत से ज्यादा धन जब घर में आता है तो वह खुशी के बजाय समस्याएं अधिक बढ़ाता है। इनके परिवार को भी विभिन्न स्रोतों से खूब धन की आवक हो रही है। ऊपर से भैया के प्रभाव का अहंकार भी है। शास्त्री जी यह कहकर बच नहीं सकते कि मेरा उससे कोई संबंध नहीं है, पूरा विश्व ही मेरा परिवार है। यदि दुनिया को सुधारने निकले हो तो अपना घर पहले ठीक करना जरूरी है।
दीपक शर्मा
चैतन्यलोक