नीट पेपर लीक मामले में आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी आदि को खुले आम गाली देने वाले तत्वों को माफी नहीं मिलनी चाहिए। वीडियो के माध्यम से उनकी खोज कर इन्हें पर्याप्त सजा दी जानी चाहिए।
आंदोलन के दौरान बड़ी भीड़ का लाभ उठाते हुए जिन युवाओं एवं युवतियों ने गालियां देकर अपने संस्कार का परिचय दिया है, वह अशोभनीय है।
आंदोलन के दौरान गालियां दी जाने की कोई जरूरत नहीं थी, क्योंकि अभी तक आंदोलनों के दौरान नारे लगाए जाते हैं, उसमें भी राष्ट्रविरोधी नारे लगाने का कड़ा विरोध किया जाता है। जंतर-मंतर के आंदोलन में सरेआम प्रधानमंत्री को गालियां दी गईं।
यह बात मानी जा सकती है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने में सरकार ने अनावश्यक विलंब किया, वरना स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। इसके बावजूद अशोभनीय आंदोलन अनुचित है।
ज्ञातव्य है कि भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों पर गाली देने के विरुद्ध धाराएं हैं और वैसे भी सार्वजनिक स्थानों पर युवाओं ने अपने संस्कार का जो परिचय दिया है उसका तगड़ा विरोध किया जाना चाहिए।
सरकार ने अपनी सहृदयता का परिचय देकर आंदोलनकारियों की मांगें मानी क्योंकि आंदोलन में छात्रों की आड़ में राष्ट्र विरोधी शक्तियां सक्रिय हो गई थीं।
परिस्थितियां जो भी रही हों, आज पूरा देश यह चाहता है कि जब आम आदमी को सरेआम गाली दिया जाना अपराध है, तो प्रधानमंत्री जैसे वरिष्ठ एवं सम्मानित पद पर बैठे व्यक्ति को गालियां देने पर कड़ी कार्यवाही बहुत जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।
सरकार के निर्णयों का विरोध तंत्र में आवश्यक है, लेकिन वह अशोभनीय न हो।
दीपक शर्मा
चैतन्यलोक