ये अंधविश्वास है, मूर्खता है, संयोग है कि फ्रिज में बाबा अमरनाथ की आकृति उभर आई और बाकायदा उसकी पूजा-पाठ शुरू हो गई। इन दिनों देश में अंधविश्वास की बाढ़ आई है। पर्ची वाले बाबा, रुद्राक्ष वाले बाबा करोड़ों रुपयों में खेल रहे हैं और उनके देखा-देख नए-नए बाबा पैदा होते जा रहे हैं।
गांव-शहर के भोले-भाले लोग तुरंत इन बाबाओं के यहां लाइन लगाकर बैठ जाते हैं। आज के समय में हर कोई समस्या से घिरा है। ज्यादातर लोग तो पहले स्वयं ही समस्या पैदा करते हैं, फिर उसके निदान के लिए यहां-वहां भटकते रहते हैं। वे नहीं जानते कि जहां अंधविश्वास है वहां बंटाधार है।
जिनके पास ये अपनी समस्याएं लेकर जा रहे हैं, वे खुद बेचारे अपनी समस्याओं से परेशान हैं। लेकिन समस्या यह है कि लोग उस विश्वास से हमेशा दूर रहते हैं, जो कहता है कि आत्मा ही परमात्मा है। उसके लिए आपको बाहर भटकने की जरूरत नहीं है। उसके लिए भीतर झांकना पड़ेगा। काम, क्रोध, लोभ, मोह की धूल झाड़ोगे तो परमात्मा स्वयं प्रकट होगा और सभी समस्याओं का निदान वहीं मिलेगा।
समस्या ये है कि हम स्वयं अपने लिए कुछ करना नहीं चाहते। दूसरों के भरोसे रहते हैं और ये दूसरे हमारा भला नहीं करते, खुद फायदा उठाकर अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं।
अपने आप पर विश्वास होता तो वही विश्वास परमशक्ति के प्रति विकसित होगा, उसके बाद सारी समस्याएं स्वतः हल हो जाएंगी। कभी मूर्तियां दूध पीने लगती हैं, कभी फ्रिज में भगवान की आकृति बन जाती है। ये सब अंधविश्वास है।
यहां अंधविश्वास के बल पर करोड़ों रुपयों के उद्योग चल रहे हैं। जो इनके चक्कर में पड़ा उसका बंटाधार है और जिसने विश्वास का सहारा लिया उसका बेड़ा पार है। वह इस लोक में भी सुखी है और परलोक में भी।
दीपक शर्मा
दैनिक चैतन्यलोक