चैतन्यलोक
संपादकीय

आंदोलन के गर्भ से पैदा होते हैं भस्मासुर

Author

Deepak Sharma

18 Jul 2026 | 07:59 AM
आंदोलन के गर्भ से पैदा होते हैं भस्मासुर

आंदोलनरत सोनम वांगचुक के मामले में मोदी सरकार धर्मसंकट में है। वह जानती है कि यदि आंदोलन कुचल दिया गया तो उसमें से उसी प्रकार का नेता पैदा होगा जैसा अन्ना हजारे के आंदोलन से अरविंद केजरीवाल पैदा हुआ था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर डटे हुए सोनम के आसपास विरोधी नेताओं का जमावड़ा भी हो रहा है तथा वे बेतुके बयान भी दे रहे हैं।

प्रश्न यह भी है कि क्या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से कुछ बदलेगा? लेकिन यह देश वर्तमान नेताओं से उसी प्रकार नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांगने का आदी है जैसा रेलमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री ने रेल दुर्घटना के बाद दिया था।

देश की आजादी के बाद राजनीति में नैतिकता की चाह रखने वाले जिंदा हैं, लेकिन बेशर्मी की चादर ओढ़े नेताओं को कहाँ फर्क पड़ता है? सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बावजूद विजय शाह मंत्री बने हुए हैं।

ऐसे और भी बहुत सारे उदाहरण हैं, लेकिन वर्षों से राजनीति में जो आदर्श बने हुए हैं, वैसी ही अपेक्षा वर्तमान राजनेताओं से भी की जाती है। वर्तमान परिस्थितियों में जो घटनाएं हो रही हैं, चाहे वे पेपर लीक की हों या अनाप-शनाप बयान देने की, इसमें सभी सत्ताधारी बराबरी से दोषी हैं।

मौसेरे भाई जैसे हैं। वे न तो अपने भाई पर कार्रवाई का साहस रखते हैं, न आंदोलन को कुचलने की हिम्मत कर सकते हैं, क्योंकि वहाँ से जो नेता पैदा होगा, वह खुद तो भविष्य में सिर पर चढ़ेगा ही, अपने साथ बहुत सारे भस्मासुर भी लेकर आएगा।

दीपक शर्मा
दैनिक चैतन्यलोक

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