चैतन्यलोक
संपादकीय

सुविधा 10% दुविधा 100%

Author

Deepak Sharma

22 Jul 2026 | 08:57 AM
सुविधा 10% दुविधा 100%

इस शहर को 10 प्रतिशत सुविधा पाने के लिए 100 प्रतिशत दुविधा और असुविधा झेलना पड़ती है। सबसे पहले मकान तोड़कर रास्तों को चौड़ा करने का जो नगर निगम का जुनून है, उसकी वास्तविकता जान लीजिए।

फिलहाल शंकरगंज, जिंसी और छावनी में मकान तोड़े गए तथा वहां चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है। ये रास्ते आवागमन के लिए बंद हैं तथा नगर निगम की जेब को देखते हुए दो से तीन साल पूर्ण विकास में लगेगा। इस दौरान वहां रहने वाले लोगों को आने-जाने की परेशानी देखनी पड़ेगी। जो लोग वहां अपनी दुकानें चलाते थे, वे बंद पड़ी रहेंगी। असुविधा पूरी 100 प्रतिशत रहेगी।

अब देखें कि इससे पहले जो रास्ते चौड़े किए गए, उसमें लोहारपट्टी, जहां दुकानों का अतिक्रमण है, दुकानदार आधे रोड तक अपना सामान, कार आदि रखते हैं तथा जनता को आवागमन के लिए पहले जितना रास्ता मिलता था, आज भी उतना ही मिल रहा है।

खजूरी बाजार के भी यही हाल हैं। चौड़ीकरण से पूर्व यह रास्ता वन-वे हुआ करता था। तीन साल तक तोड़ने-बनाने की कवायद के बाद रोड चौड़ा हुआ तो इसे टू-वे कर दिया गया। आधा रास्ता वाहनों की पार्किंग से भरा रहता है।

प्रश्न यह है कि यदि इस प्रकार की तोड़फोड़ से जनता को सुविधा नाममात्र की मिल पाती है, तो इन सबका मतलब क्या है..? आना-जाना बंद, व्यवसाय बंद, पैसों का अपव्यय—ये सब क्या है..?

मास्टर प्लान का हवाला देकर बगैर मुआवजा दिए लोगों के मकान तोड़ दिए जाते हैं और शिवाजी मार्केट में नगर निगम को स्वयं की मालिकी की दुकानें हटवाने के लिए कोर्ट में जूझना पड़ता है।

दीपक शर्मा
दैनिक चेतन्यलोक

टिप्पणियाँ (0)

टिप्पणी करने के लिए लॉग इन या रजिस्टर करें।

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!

होम वीडियो Sports श्रेणियाँ ई-पेपर