जन्मदिन मनाने का उत्साह कहता है कि खूब दीये लगाओ, चूंकि मुख्य उज्जैन में रहते हैं तो सबसे ज्यादा दीये वहां लगाओ, बाकी भी जगह लगाओ, इसमें कितना तेल जल रहा है, तन-मन-धन सब व्यय हो रहा है। दीपावली से पहले खूब दीये लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाने की होड़ के लिए आशीर्वाद नहीं उत्साह उकसाता है। इसी बीच यदि अनेक युवा रक्तदान करके प्रधानमंत्री जी का जन्मदिन मनाते हैं तो वास्तविक आशीर्वाद उन्हें ही मिलना चाहिए। आशीर्वाद वाला रक्तदान है यह।
भावना की अनसुनी कैसे हो जाती है… जिनका जन्मदिन हम मना रहे हैं वे सादगी पसंद व्यक्तित्व हैं।
पिछले दिनों लगातार दो बार टीवी पर आकर घोषणा कर चुके हैं, विदेश यात्रा मत करो, सोना मत खरीदो। ये अलग बात है कि उन्हें स्वयं को देशहित के लिए विदेश यात्राएं करना पड़ती है। उन्हीं का कहना ये भी है कि तेल कम फूंको। हालांकि उनका इशारा डीजल-पेट्रोल की तरफ है, पर तेल तो तेल है, पेट्रोल-डीजल हो या मूंगफली-सोयाबीन, वे जो राष्ट्रवासियों को सलाह दे रहे हैं वह माकूल है, क्योंकि उनके बताए उपायों से विदेशी मुद्रा की बचत होगी, लेकिन देशी मुद्रा बचाने की चिंता भी ‘उत्साह’ के बीच भुलाना नहीं चाहिए।
जन्मदिन पर संकल्प लेना चाहिए — ज्यादा से ज्यादा रक्तदान, जरूरतमंदों की सेवा-मदद, शिक्षा-चिकित्सा में सहयोग। कुछ ऐसा हो कि हमारा तेल जले, लेकिन विपक्षियों की …… नहीं जलना चाहिए।