मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ मध्यप्रदेश में नए दौर की शुरुआत है। प्रथम दृष्टया वे लोग खुश हो गए हैं जो पहले किसी समय शासकीय परिवहन सेवा का लाभ ले चुके हैं। साथ ही निजी बस ऑपरेटरों की गुंडागर्दी पर इससे अंकुश लगेगा। वह गुंडागर्दी है चाहे जब किराया बढ़ा देना, अनाप-शनाप माल ढोना, ट्रक में जितना माल परिवहन होता है उससे आधा ये बस की छत पर लाद लेते हैं। यात्रियों के साथ अभद्रता, वाहनों की बेतहाशा गति में संचालन कर दुर्घटनाओं को न्योता देना, अनेक समस्याएं थी, जिनसे अब यात्रियों को निजात मिल सकती है।
पहले ऐसा नहीं होता था कि कोई त्योहार आया तो किराए में अनाप-शनाप वृद्धि हो जाती हो। हमेशा तय किराया ही लिया जाता था, बल्कि रक्षाबंधन के अवसर पर तो बहनों को नि:शुल्क यात्रा की सुविधा मिलती थी। निजी बस ऑपरेटरों का एक ही उद्देश्य रहता है कि हर दूसरे साल नई बस वे खरीदकर अपने बेड़े में वृद्धि करते रहें। यात्रियों की असुविधा से उन्हें कोई मतलब नहीं है। इनके स्टाफ में लुंगाड़े और असामाजिक वृत्ति वाले लोग हैं। अकेली महिलाओं का इनमें यात्रा करना सुरक्षित नहीं माना जाता। साथ ही सरकारी बसों में दो चालक-एक परिचालक तय है। इन निजी बसों में चार-पांच लोगों का स्टाफ रहता है। ये अपनी कमाई के लिए रास्ते में पड़ने वाले गांव-शहरों में बसें रोककर यात्रियों को अवैध रूप से बैठाते हैं, ताकि ऊपरी कमाई कर सकें।
रात्रिकालीन सफर में कोई भी रास्ते में हाथ देकर ये बसें रुकवा लेता है, जबकि ये नॉन स्टॉप के नाम पर चलती है। इन कृत्यों से आपराधिक घटना की संभावना बनी रहती है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अनेक उम्मीदें लेकर आई है।
दीपक शर्मा
चैतन्यलोक