चैतन्यलोक
संपादकीय

आक्रोश तो लाजिमी है…

Author

Deepak Sharma

14 Sep 2026 | 09:29 AM
आक्रोश तो लाजिमी है…

मालवा माटी के संत पं. श्री कमल किशोरजी नागर को धमकी देने के बाद उपजा आक्रोश लाजिमी है। धर्मक्षेत्र में पंडित श्री नागर ने जो योगदान दिया है, वह स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाना चाहिए। उन्होंने न केवल धार्मिक प्रवचन से गांवों-शहरों में धर्म का प्रचार किया है, बल्कि 240 से अधिक गौशालाओं का संचालन उनके द्वारा सुचारू रूप से किया जा रहा है। लोग स्वयं के रहने के लिए अच्छे से अच्छा घर चाहते हैं, उसी तर्ज पर पं. श्री नागर ने गौ के लिए भव्य एवं सुसज्जित गौशालाओं का निर्माण करवाया है। ओंकारेश्वर एवं नेमावर में नर्मदा नदी के किनारे भव्य घाटों का निर्माण किया है तथा अनेक मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाकर धर्म ध्वजा को बुलंद किया है। न केवल मप्र, बल्कि देशभर में उनके भक्त हैं तथा झाबुआ के भूराडाबरा स्थित गौशाला में प्रवचन के दौरान उन्होंने हल्की भाषा का उपयोग कर जो धमकी भरा पत्र दिया गया है, उससे उनके भक्तों में भारी आक्रोश है। वे अपने-अपने स्तर पर इस कृत्य का विरोध कर रहे हैं। दूसरी तरफ पं. श्री नागर जी के ही नागर समाज में आक्रोश है तथा समाजजन स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन कर प्रशासन को ज्ञापन देकर मांग कर रहे हैं कि धमकी देने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही नागर समाज का आक्रोश भी लाजिमी है, क्योंकि जहां लोकोहित में बड़ी संख्या में पं. श्री नागर जी ने कार्य किए हैं, वहीं नागर समाज हेतु उज्जैन में भव्य श्री हाटकेश्वर धाम का निर्माण करवाया है। अन्य स्थानों पर समाज कार्यों में तन-मन-धन से सहयोग देने के अलावा समाज के कार्यक्रमों में वे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष खुले दिल से सहयोग करते हैं। पं. श्री कमल किशोर जी नागर द्वारा धर्म एवं समाज के प्रति जो योगदान दिया गया है, वह अतुलनीय एवं अनुकरणीय है। कोई ओछा-पौना आदमी आकर उन्हें घटिया शब्दों में धमकी दे जाए, यह शासन-प्रशासन के लिए शर्म की बात है। जाहिर है कि शासन-प्रशासन ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे तथा ऐसे तत्व स्वयं प्रस्तुत होकर अपने कृत्य के लिए सजा भुगतें।

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