नई दिल्ली। देश में चीनी की कीमतों को लेकर एक बार फिर बिचौलियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। चीनी मिलों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में फैक्ट्री गेट यानी एक्स-मिल कीमतों में करीब 18-19% की गिरावट आई है, लेकिन इसका फायदा खुदरा ग्राहकों तक पूरी तरह नहीं पहुंचा है। सरकार ने भी 28 अगस्त को कहा था कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और एक्स-मिल कीमतों में करीब 20% कमी आई है।
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज (NFCSF) के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने कहा कि फिलहाल मिलों से चीनी करीब 45-46 रुपये प्रति किलो के भाव पर निकल रही है। उनके मुताबिक परिवहन और अन्य खर्च जोड़ने के बाद उपभोक्ता तक इसकी कीमत लगभग 50 रुपये प्रति किलो होनी चाहिए।
पाटिल ने कहा कि यदि बाजार में चीनी इससे काफी अधिक कीमत पर बिक रही है तो इसके पीछे बिचौलियों की भूमिका हो सकती है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक खुदरा कीमत करीब 62 रुपये प्रति किलो, जबकि थोक कीमत करीब 58 रुपये प्रति किलो बताई गई है।
सरकार भी कर चुकी है स्टॉक की जांच
चीनी कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के बाद सरकार ने चीनी मिलों और बाजार में उपलब्ध स्टॉक की निगरानी बढ़ाई थी। कुछ मिलों में घोषित स्टॉक से अधिक चीनी पाए जाने की बात भी सामने आई थी। सरकार ने स्टॉक लिमिट, स्टॉक वेरिफिकेशन और शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात जैसे कदम उठाए हैं।
NFCSF का कहना है कि देश में चीनी की कमी नहीं है। ऐसे में अब बड़ा सवाल यही है कि मिल से सस्ती हुई चीनी का फायदा आम उपभोक्ता तक कब पहुंचेगा।