नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में 7.8% की वास्तविक GDP Growth दर्ज की है। यह आंकड़ा RBI के 7% अनुमान से काफी अधिक है। लेकिन आंकड़े जारी होने के बाद GDP की गणना और पुरानी सीरीज में किए गए संशोधनों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अब केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए गणना की प्रक्रिया का बचाव किया है।
सरकार ने क्यों बताया 7.8% सही?
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने स्पष्ट किया कि GDP की नई सीरीज में 2022-23 को नया Base Year बनाया गया है। इसके साथ नए डेटा स्रोत, अपडेटेड प्रशासनिक आंकड़े और ज्यादा विस्तृत Price Indices को शामिल किया गया है। मंत्रालय के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य GDP अनुमान को ज्यादा सटीक बनाना है, न कि Growth Rate को बढ़ाना।
नई पद्धति में Manufacturing के लिए Double Deflation और कीमतों के आकलन में ज्यादा व्यापक डेटा का इस्तेमाल किया गया है। सरकार का कहना है कि करीब 180 की तुलना में अब 300 से ज्यादा Price Deflators का इस्तेमाल किया जा रहा है।
2.6% Growth के दावे पर सरकार का पलटवार
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने पुराने और नए GDP आंकड़ों की तुलना के आधार पर करीब 2.6% की “वास्तविक” Growth का दावा किया था। सरकार ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अलग-अलग GDP सीरीज के आंकड़ों को मिलाकर ऐसी तुलना करना सांख्यिकीय रूप से उचित नहीं है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि GDP के आंकड़े राजनेता या मंत्री नहीं बनाते। उनका कहना है कि अलग-अलग सीरीज के आंकड़ों को मिलाकर जनता के सामने गलत तस्वीर पेश की जा रही है।
Growth के पीछे Manufacturing और Services
अप्रैल-जून तिमाही में Manufacturing सेक्टर की Growth 9.2% रही, जबकि Financial, Real Estate और IT Services सहित संबंधित सेवा गतिविधियों में करीब 12.1% की वृद्धि दर्ज हुई। मजबूत आर्थिक प्रदर्शन ने कई अर्थशास्त्रियों को FY27 के Growth अनुमान बढ़ाने के लिए भी प्रेरित किया है।