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नेपाल का यू-टर्न: विदेशी मदद लेने को तैयार, भारत ने भेजी 11 सदस्यीय रेस्क्यू टीम

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Deepak Sharma

29 Aug 2026 | 12:32 PM
नेपाल का यू-टर्न: विदेशी मदद लेने को तैयार, भारत ने भेजी 11 सदस्यीय रेस्क्यू टीम

काठमांडू। नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड के बाद विदेशी राहत एवं बचाव दलों को लेकर सरकार ने अपना रुख बदल दिया है। शुरुआती तौर पर नेपाल ने विदेशी Search and Rescue Teams की मदद लेने से इनकार किया था, लेकिन हालात बिगड़ने और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के बाद अब उसने विशेषज्ञ अंतरराष्ट्रीय सहायता की अनुमति दे दी है।

नेपाल की मांग के बाद भारत ने 11 सदस्यीय विशेष रेस्क्यू टीम नेपाल भेज दी है। टीम में मेडिकल स्टाफ के साथ-साथ Tunnel Rescue Experts भी शामिल हैं। भारतीय टीम का फोकस मुश्किल इलाकों में फंसे लोगों को निकालने और राहत-बचाव अभियान में तकनीकी सहायता देने पर रहेगा।

नेपाल सरकार ने विदेशी सहायता को लेकर अपने रुख में बदलाव ऐसे समय किया है, जब बाढ़ से मरने वालों की संख्या 600 से ज्यादा हो चुकी है और करीब 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है, जिनमें भारतीय श्रद्धालु और पर्यटक शामिल हैं।

नेपाल को किन क्षेत्रों में चाहिए मदद?

नेपाल ने सामान्य विदेशी Search and Rescue Teams के बजाय विशेष तकनीकी सहायता की जरूरत बताई है। इसमें फंसे लोगों को निकालना, सड़क और संचार व्यवस्था बहाल करना, शवों की पहचान, DNA Testing और सुरक्षित Body Storage जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में आवाजाही बहाल करने के लिए Bailey Bridges की भी जरूरत बताई गई है।

भारत पहले ही नेपाल को राहत सामग्री भेज चुका है और अब विशेषज्ञ टीम की तैनाती के साथ राहत अभियान में अपनी भूमिका और मजबूत कर रहा है।

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