मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर (Analogue Paneer) की बिक्री और उत्पादन को लेकर सरकार सख्त रुख अपना सकती है। खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं को सही उत्पाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एनालॉग डेयरी उत्पादों की जांच और कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है। देश के कई राज्यों में हाल के दिनों में एनालॉग पनीर और दूसरे नॉन-डेयरी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
एनालॉग पनीर असली दूध से बने पनीर के बजाय अलग-अलग सामग्री से तैयार किया जाने वाला उत्पाद है। इसमें वनस्पति फैट, मिल्क प्रोटीन, स्टार्च, इमल्सीफायर और स्टेबलाइजर जैसी सामग्री इस्तेमाल की जा सकती है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से कम लागत वाले फूड प्रोडक्ट्स और फूड सर्विस इंडस्ट्री में किया जाता है।
FSSAI के नियमों के मुताबिक Cheese Analogue को “Paneer” के नाम से बेचना गलत है। FSSAI ने अप्रैल 2026 में स्पष्ट किया था कि ऐसे उत्पादों की सही और स्पष्ट लेबलिंग जरूरी है।
उपभोक्ताओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि पैकेट या उत्पाद के लेबल को ध्यान से देखें। यदि उस पर “Paneer Analogue”, “Cheese Analogue” या “Imitation” जैसी जानकारी दी गई है, तो वह पारंपरिक दूध से बना पनीर नहीं है।
मध्य प्रदेश में यदि सरकार इस संबंध में प्रतिबंध या व्यापक कार्रवाई लागू करती है, तो होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकानों, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। साथ ही खाद्य विभाग की जांच और सैंपलिंग भी बढ़ाई जा सकती है।