नई दिल्ली/हेग। भारत और नीदरलैंड के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल यूरोप दौरे पर हैं। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के कारोबारियों के बीच साझेदारी बढ़ाने, भारतीय उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजार में अवसर तलाशने और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
पीयूष गोयल 26 अक्टूबर को नीदरलैंड के हेग में आयोजित होने वाले भारत-नीदरलैंड बिजनेस फोरम में दोनों देशों के कारोबारियों को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में नीदरलैंड के विदेश व्यापार एवं विकास सहयोग मंत्री भी शामिल होंगे। फोरम के बाद विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा के लिए सेक्टर आधारित बैठकें और कारोबारियों के बीच संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं।
करीब 100 भारतीय कारोबारी और स्टार्टअप प्रतिनिधिमंडल में शामिल
केंद्रीय मंत्री के जर्मनी और नीदरलैंड दौरे में करीब 100 भारतीय कारोबारी और स्टार्टअप प्रतिनिधि शामिल हैं। दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों का विस्तार करने के साथ निवेश और तकनीकी साझेदारी के नए अवसर तलाशना है।
चर्चा के प्रमुख क्षेत्रों में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, हाईटेक और नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग उत्पाद और सेवा क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सहयोग से भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने और डच कंपनियों के साथ व्यावसायिक साझेदारी विकसित करने के अवसर मिल सकते हैं।
रॉटरडैम बंदरगाह से यूरोपीय बाजार तक पहुंच पर जोर
पीयूष गोयल ने 25 अक्टूबर को नीदरलैंड के रॉटरडैम बंदरगाह का दौरा किया। यूरोप के प्रमुख बंदरगाहों में शामिल रॉटरडैम भारतीय वस्तुओं को यूरोपीय बाजार तक पहुंचाने और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
दौरे के दौरान बंदरगाह की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और आपूर्ति शृंखला के बुनियादी ढांचे को समझने पर जोर रहा। भारत और नीदरलैंड के बीच इस क्षेत्र में सहयोग से माल परिवहन, भंडारण और यूरोपीय बाजारों तक पहुंच के नए अवसर तलाशे जा सकते हैं।
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते से उम्मीदें
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भी इस दौरे के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल है। समझौते से बाजार पहुंच और व्यापारिक अवसरों के विस्तार की संभावनाएं हैं। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव समझौते की अंतिम शर्तों और लागू होने के बाद सामने आएगा।
भारत और नीदरलैंड के बीच व्यापारिक संवाद को आगे बढ़ाने की यह पहल ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों पक्ष विनिर्माण, तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में सहयोग बढ़ाने के अवसर तलाश रहे हैं। अब बिजनेस फोरम और उसके बाद होने वाली क्षेत्रवार बैठकों से यह स्पष्ट होगा कि किन क्षेत्रों में बातचीत को ठोस निवेश और व्यावसायिक परियोजनाओं में बदला जा सकता है।