केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में पिछले 18 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत और आगे संवाद जारी रखने के आश्वासन के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया।
अमित भटनागर का कहना था कि केन-बेतवा परियोजना से पर्यावरण, जैव विविधता और स्थानीय समुदायों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर वे लंबे समय से परियोजना की समीक्षा और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया की मांग कर रहे थे।
18 दिनों तक चले इस अनशन के दौरान कई सामाजिक संगठनों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और नागरिक समूहों ने उनका समर्थन किया। आंदोलन के दौरान सरकार से कई दौर की बातचीत भी हुई।
अनशन समाप्त होने के बाद अमित भटनागर ने कहा कि उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है और यदि परियोजना से जुड़े मुद्दों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।
केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। सरकार का दावा है कि इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और जल संकट की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी, जबकि पर्यावरणविद इसके पारिस्थितिक प्रभावों को लेकर लगातार चिंता जता रहे हैं।