नई दिल्ली। अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ने की आशंका है। अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देने वाले बिल को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। बिल के पक्ष में 86 और विरोध में 11 वोट पड़े।
इस कानून का निशाना रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा खरीदने वाले देशों को बनाया गया है। भारत और चीन समेत पांच बड़े खरीदार इसके दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लागू हो गया है। बिल अभी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाएगा और कानून बनने के बाद भी टैरिफ लगाना अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्णय पर निर्भर करेगा।
रूस से तेल खरीदना बना मुख्य मुद्दा
अमेरिका का तर्क है कि रूस से तेल और गैस खरीदने से उसकी अर्थव्यवस्था को राजस्व मिलता है, जिससे यूक्रेन युद्ध के लिए रूस की वित्तीय क्षमता बनी रहती है। इसी वजह से प्रस्तावित कानून में रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।
भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत रूसी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार रहा है। यदि कानून लागू होता है और भारत पर अधिकतम टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर भारतीय निर्यात, अमेरिका के साथ व्यापार और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर पड़ सकता है।
फिलहाल बिल कानून नहीं बना है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में इसकी अगली प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।