प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा के एक मामले की सुनवाई के दौरान कार्यस्थल पर कर्मचारियों को Santa Claus की लाल टोपी पहनने के लिए मजबूर किए जाने पर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी मजबूरी अलग-अलग धर्मों और मान्यताओं से जुड़े लोगों की भावनाओं को प्रभावित कर सकती है और कार्यस्थल के शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण माहौल पर भी असर पड़ सकता है।
यह मामला आगरा के V Bazar से जुड़ा है। आरोप था कि वहां वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से अधीनस्थ कर्मचारियों को Santa Claus की लाल टोपी पहनने के लिए कहा गया और इसके लिए दबाव बनाया गया। इस मामले में आगरा के सदर बाजार थाने में IPC की धारा 298 और 504 के तहत केस दर्ज किया गया था।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि V Bazar के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से Santa Claus की लाल टोपी पहनने के लिए कर्मचारियों पर मजबूरी बनाई गई थी। अदालत ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक अपने धर्म और विश्वास का पालन करने के लिए स्वतंत्र है।
कोर्ट ने संबंधित आवेदक और उसके वरिष्ठ अधिकारियों को ऐसी हिदायत दोबारा न देने की चेतावनी दी, जिससे कर्मचारियों के बीच कार्यस्थल का शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण प्रभावित हो।
मामला हाईकोर्ट तक कैसे पहुंचा?
मामले में विक्रम सिंह उर्फ विश्व विक्रम सिंह ने अपने खिलाफ दाखिल चार्जशीट, आगरा CJM के समन आदेश और आपराधिक कार्यवाही को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जांच के बाद 20 सितंबर 2023 को चार्जशीट दाखिल हुई थी और 21 दिसंबर 2023 को CJM आगरा ने समन जारी किया था।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि IPC की धारा 298 और 504 के अपराध गैर-संज्ञेय (non-cognizable) हैं। इसलिए CrPC की धारा 2(d) के तहत जांच के बाद पुलिस द्वारा दाखिल रिपोर्ट को शिकायत के रूप में माना जाना चाहिए, न कि सामान्य पुलिस केस के रूप में।
हाईकोर्ट ने इस कानूनी दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि संबंधित चार्जशीट को शिकायत के रूप में माना जाना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने दिसंबर 2023 का समन आदेश रद्द कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सक्षम अदालत कानून के अनुसार मामले को शिकायत के रूप में आगे बढ़ा सकती है।