चंडीगढ़/गुरुग्राम। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से कई जिलों में बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। गुरुग्राम समेत कई इलाकों में घंटों तक बिजली गुल रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली के साथ पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई, जबकि गुस्साए लोग रातभर सड़कों पर उतरकर विरोध जताते रहे। कुछ क्षेत्रों में बिजली कटौती करीब 24 घंटे तक पहुंच गई।
40 हजार कर्मचारी हड़ताल पर
बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त मोर्चे ने 21 अक्टूबर की रात 10 बजे से 24 अक्टूबर तक तीन दिन की हड़ताल शुरू की है। कर्मचारी हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के उस फैसले का विरोध कर रहे हैं, जिसमें निजी कंपनी Eleven Power Private Limited को गुरुग्राम और नूंह में 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया गया है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था और कर्मचारियों के भविष्य पर असर पड़ सकता है। करीब 40 हजार कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बिजली लाइनों में खराबी दूर करने और शिकायतों के निपटारे में देरी हुई। गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और अन्य जिलों में बिजली संकट की खबरें सामने आईं।
रातभर सड़कों पर उतरे लोग
लंबे समय तक बिजली नहीं आने से कई इलाकों में इन्वर्टर बंद हो गए और पानी की मोटरें नहीं चल सकीं। गुरुग्राम में नाराज लोगों ने सड़कों पर जाम लगाया। दाulatाबाद फ्लाईओवर के पास भी लोगों ने सड़क रोककर विरोध किया। फरीदाबाद और करनाल में भी बिजली कटौती से परेशान लोगों के सड़क पर उतरने की खबरें आईं
मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री बोले- कानूनी लड़ाई लड़ेंगे
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि राज्य सरकार निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले को चुनौती देगी और कर्मचारियों की चिंताओं के समाधान के लिए बातचीत के रास्ते खुले हैं। उन्होंने कर्मचारियों से हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की अपील भी की।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी कहा कि सरकार इस मामले में अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (APTEL) का रुख करेगी। उन्होंने कर्मचारियों से हड़ताल छोड़कर सरकार के साथ कानूनी लड़ाई में सहयोग करने को कहा। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि बिजली वितरण के फैसले की समीक्षा के लिए विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत विकल्प तलाशे जा सकते हैं।
निजी बिजली वितरण लाइसेंस बना विवाद की जड़
HERC के फैसले के तहत निजी कंपनी को गुरुग्राम और नूंह में सरकारी बिजली वितरण कंपनी के समानांतर काम करने का लाइसेंस मिला है। कर्मचारी संगठन इसे निजीकरण की दिशा में कदम मान रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि वह इस फैसले से सहमत नहीं है और इसे कानूनी तरीके से चुनौती देगी।
फिलहाल प्रशासन के सामने बिजली आपूर्ति बहाल रखने, शिकायतों का निपटारा करने और अस्पतालों तथा जल आपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की चुनौती है। हड़ताल 24 अक्टूबर तक प्रस्तावित है, इसलिए प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की नजर अब बिजली बहाली और सरकार-कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत पर है।