नई दिल्ली। रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की महिला कर्मचारी की मौत के बाद संभावित न्यूमोनिक प्लेग को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, रूस में फिलहाल प्लेग के व्यापक संक्रमण या महामारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी कहा है कि महामारी फैलने का कोई जोखिम नहीं है।
इस बीच भारत सरकार ने रूस में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि रूस में करीब 70 हजार भारतीय नागरिक और 30 हजार से अधिक भारतीय छात्र रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर अपने नागरिकों के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे।
क्या बोली भारत सरकार?
प्लेग की स्थिति को लेकर सवाल पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मामले में संबंधित देश और वहां के स्वास्थ्य अधिकारी ज्यादा जानकारी देने की स्थिति में हैं। भारत सरकार ने साथ ही स्पष्ट किया कि रूस में मौजूद भारतीय नागरिकों से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए वह पूरी तरह तैयार है।
क्या है रूस में प्लेग का मामला?
रूस के इरकुत्स्क क्षेत्र में स्थित एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की 28 वर्षीय कर्मचारी की गंभीर निमोनिया के बाद मौत हुई थी। इसके बाद संभावित न्यूमोनिक प्लेग की आशंका जताई गई। करीब 200 लोगों को निगरानी या क्वारंटीन में रखा गया था। हालांकि, रूसी अधिकारियों के अनुसार संपर्क में आए लोगों में खतरनाक संक्रमण के संकेत नहीं मिले हैं।
WHO ने रूस से मामले से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मांगी है। WHO के अनुसार अभी यह स्पष्ट नहीं है कि महिला की मौत का कारण वास्तव में प्लेग था या नहीं। इसलिए मौजूदा स्थिति को प्लेग महामारी कहना जल्दबाजी होगी।
भारत में खतरे को लेकर क्या स्थिति?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर रूस में बड़े पैमाने पर मानव-से-मानव संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। यूरोपीय सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ने भी कहा है कि अभी लगातार मानव-से-मानव संक्रमण का कोई प्रमाण नहीं मिला है।