राहुल गांधी का दावा- मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 से शुरू हुई ‘वोट चोरी’, कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने दावा किया कि बड़े पैमाने पर कथित ‘वोट चोरी’ की शुरुआत मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 से हुई थी। उन्होंने कहा कि उनकी टेक्निकल एक्सपर्ट टीम ने चुनाव परिणामों को लेकर सवाल उठाए थे।
राहुल गांधी के मुताबिक, उनकी टीम का मानना था कि चुनाव में सामने आए परिणाम सामान्य परिस्थितियों में संभव नहीं थे। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए।
2023 के एमपी चुनाव को लेकर कांग्रेस का दावा
कांग्रेस की ओर से दावा किया गया है कि 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। पार्टी का आरोप है कि इन शिकायतों के बावजूद कथित फर्जी या संदिग्ध मतदाताओं के नाम पर्याप्त रूप से नहीं हटाए गए।
कांग्रेस ने 2018 और 2023 की मतदाता सूचियों में हुए बदलावों का भी हवाला दिया है। हालांकि, 2023 में मध्य प्रदेश में करीब 33 लाख ‘फर्जी वोटर’ होने का दावा चुनाव आयोग द्वारा स्वीकार किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती है। इसलिए इस आंकड़े को आरोप/दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कुल मतदाताओं और मतदान से संबंधित विस्तृत आंकड़े आयोग ने प्रकाशित किए हैं। (Election Commission of India)
राहुल गांधी ने EVM और वोटर लिस्ट पर भी उठाए सवाल
राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और मतदाता सूचियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनकी वेबसाइट पर भी ‘Vote Chori’ अभियान के तहत चुनावी अनियमितताओं को लेकर आरोप और सामग्री प्रकाशित की गई है। (Rahul Gandhi)
राहुल गांधी ने अपने ताजा बयान में आरोप लगाया कि कथित तौर पर चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का मुद्दा अब बड़े स्तर तक पहुंच चुका है। हालांकि, इन आरोपों और उनके आधार पर लगाए गए विभिन्न आंकड़ों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच के आधार पर अलग-अलग की जानी होगी।
नोट: 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे और मतदाता सूची से जुड़े आधिकारिक आंकड़े चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं। चुनाव में ‘वोट चोरी’ हुई थी या नहीं, यह एक राजनीतिक आरोप है, जिसे स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र और आधिकारिक प्रमाण आवश्यक हैं। (Election Commission of India)