मप्र में बहुत सारे बड़े प्रवचनकारों को शासन की ओर से सुरक्षा हेतु पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। एक तरफ जहां पुलिस थानों पर पुलिसकर्मियों की कमी की वजह से अपराध बढ़ रहे हैं, वहीं अनावश्यक रूप से बड़ी संख्या में प्रवचनकारों, साधु-संतों की सुरक्षा हेतु पुलिसकर्मी स्थाई रूप से तैनात कर रखे हैं।
इन प्रवचनकारों को किससे खतरा है जो सरकार इनकी सुरक्षा जनता की गाढ़ी कमाई से प्राप्त टैक्स से करवा रही है? यह मामला उपकृत करने एवं झांकीबाजी से जुड़ा हुआ है। चूंकि प्रवचनकारों से हजारों की संख्या में लोग जुड़े हैं, जिन्हें सरकार वोट बैंक की तरह देखती है। इसलिए इन्हें उपकृत करने के लिए पुलिसकर्मियों को नियुक्त किया गया है।
प्रवचनकार झांकीबाजी के लिए ये नियुक्तियां करवा लेते हैं, जबकि उन्हें अपने खर्च पर बॉडीगार्ड नियुक्त करना चाहिए। यदि किसी से खतरा है तो भी, यह भी बताया जाता है कि कथाओं के समापन के पश्चात दान में लाखों रुपए की प्राप्त राशि लेकर रात-बिरात चलते हैं, इसके लिए भी सुरक्षा की जरूरत होती है।
ये भी महत्वपूर्ण है कि छोटे-मोटे प्रवचनकारों को ये सुविधा नहीं मिलती, क्या उन्हें कोई खतरा नहीं है या उनके पास बड़ा वोट बैंक नहीं है? कथाकारों के बीच ये भेदभाव क्यों? बड़े प्रवचनकार लाखों रुपए छाप रहे हैं, वे तो स्वयं के व्यय से भी बॉडीगार्ड रख सकते हैं, इनकी सुरक्षा का भार सरकार क्यों उठाए..?
• दीपक शर्मा
चैतन्यलोक