नई दिल्ली/भुवनेश्वर। भारत के समुद्री क्षेत्र में तेल और गैस की खोज को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सरकारी ऊर्जा कंपनी ONGC को महानदी ऑफशोर बेसिन में डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन के दौरान गैस की खोज में सफलता मिली है। महानदी बेसिन को भारत के प्रमुख संभावित डीपवॉटर हाइड्रोकार्बन क्षेत्रों में गिना जाता है।
सरकार के अनुसार महानदी समेत भारत के डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की बड़ी संभावनाएं हैं। 2026 में शुरू की गई ‘समुद्र मंथन’ नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम का भी उद्देश्य ऐसे समुद्री क्षेत्रों में खोज और उत्पादन को गति देना है।
महानदी बेसिन पर बढ़ा फोकस
महानदी ऑफशोर क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन खोज का काम लंबे समय से चल रहा है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक ONGC ने महानदी ऑफशोर में पहले भी गैस की खोज की है। 2024 के सरकारी आंकड़ों में महानदी ऑफशोर में ONGC की दो गैस खोजों का उल्लेख किया गया था।
जुलाई 2026 में महानदी ऑफशोर बेसिन में पहला appraisal well MN-DWN18-1-HD ड्रिल करने की शुरुआत भी हुई थी। यह चार प्रस्तावित डीपवॉटर कुओं में पहला था, जिनका उद्देश्य क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की क्षमता का विस्तृत आकलन करना है।
भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए क्यों अहम?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस के नए संसाधनों की खोज से भविष्य में आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
सरकार की समुद्र मंथन योजना के तहत 2030-31 तक ऑफशोर एक्सप्लोरेशन को बढ़ावा देने के लिए ₹84,084 करोड़ का प्रावधान किया गया है। योजना का लक्ष्य घरेलू तेल और गैस उत्पादन तथा देश के हाइड्रोकार्बन संसाधन आधार को बढ़ाना है।