चैतन्यलोक
मध्य प्रदेश

वोटर लिस्ट विवाद पर कांग्रेस का भाजपा पर पलटवार, उठाए सवाल

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Divyansh Sharma

25 Sep 2026 | 02:51 PM
वोटर लिस्ट विवाद पर कांग्रेस का भाजपा पर पलटवार, उठाए सवाल

भोपाल। मध्य प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस ने भाजपा के स्पष्टीकरण पर पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अमित चौरसिया ने आरोप लगाया कि जब भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं, भाजपा की ओर से उसका बचाव किया जाता है।

कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा उठाए गए सवालों का हवाला देते हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हटाए गए नामों का मुद्दा उठाया है। कांग्रेस का कहना है कि ड्राफ्ट सूची में 42.74 लाख नाम बाहर हुए थे, जबकि दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची में करीब 34.25 लाख नाम कम हुए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए नामों में स्थानांतरित/अनुपस्थित, मृत और एक से अधिक स्थान पर दर्ज मतदाताओं की श्रेणियां शामिल थीं।

कांग्रेस ने उठाए फिजिकल वेरिफिकेशन पर सवाल

अमित चौरसिया ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने की प्रक्रिया को केवल सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताना पर्याप्त नहीं है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि क्या इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने से पहले पर्याप्त भौतिक सत्यापन किया गया था।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में बूथ और क्षेत्रवार जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हटाए गए नामों का कारण क्या था और दावे-आपत्तियों के बाद कितने नाम वापस जोड़े गए।

चुनाव आयोग से मांगा कारणवार विवरण

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चुनाव आयोग से अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए 34.25 लाख नामों का विधानसभा, जिला और कारणवार विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही कांग्रेस ने नाम दोबारा जोड़ने के आवेदनों पर लिए गए निर्णयों की जानकारी और डिजिटल चुनावी व्यवस्था में ऑडिट ट्रेल की मांग भी की है।

28 सितंबर को भोपाल और 29 को जिलों में प्रदर्शन

कांग्रेस ने मतदाता सूची के मुद्दे को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 28 सितंबर को भोपाल में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के घेराव और 29 सितंबर को जिला स्तर पर प्रदर्शन की योजना है।

कांग्रेस का कहना है कि उसका आंदोलन मतदाता सूची की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकार से जुड़े सवालों को लेकर है। वहीं, मतदाता सूची में हुए बदलावों के कारणों और प्रक्रिया से संबंधित अंतिम स्थिति चुनाव आयोग के आधिकारिक विवरण से स्पष्ट होगी।

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