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मध्य प्रदेश

दिग्विजय सिंह बोले: सिंधिया और कमलनाथ के ईगो से गिरी कांग्रेस सरकार, रखी थीं दो बड़ी मांगें

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Divyansh Sharma

12 Oct 2026 | 11:17 AM
 दिग्विजय सिंह बोले: सिंधिया और कमलनाथ के ईगो से गिरी कांग्रेस सरकार, रखी थीं दो बड़ी मांगें

भोपाल। मध्य प्रदेश में मार्च 2020 में गिरी कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सरकार गिरने के पीछे तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच मतभेद, राजनीतिक महत्वाकांक्षा और आपसी खींचतान को जिम्मेदार बताया। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, सिंधिया चाहते थे कि तुलसी सिलावट को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC) बनाया जाए और गोविंद सिंह राजपूत को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिले, लेकिन कमलनाथ इन मांगों पर सहमत नहीं हुए।

सिंधिया की मांगों पर नहीं बनी सहमति

दिग्विजय सिंह के अनुसार, 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री पद के इच्छुक थे, लेकिन विधायकों का पर्याप्त समर्थन कमलनाथ के साथ था। बाद में कमलनाथ ने सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने और उनके किसी समर्थक को उपमुख्यमंत्री बनाने का विकल्प दिया था।

दिग्विजय सिंह का दावा है कि सिंधिया इसके बजाय तुलसी सिलावट को PCC चीफ और गोविंद सिंह राजपूत को डिप्टी सीएम बनवाना चाहते थे। इन मांगों पर सहमति नहीं बनने से दोनों नेताओं के बीच तनाव बढ़ता गया।

ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर भी बढ़ा विवाद

दिग्विजय सिंह ने बताया कि कमलनाथ और सिंधिया के बीच मतभेद दूर करने के लिए एक उद्योगपति के घर डिनर बैठक आयोजित की गई थी। इस दौरान ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में अधिकारियों की नियुक्तियों और तबादलों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

उनके मुताबिक, उन्होंने और सिंधिया ने अधिकारियों की नियुक्तियों से संबंधित एक सूची तैयार कर उस पर हस्ताक्षर किए और कमलनाथ को भेजी। दिग्विजय सिंह का आरोप है कि सूची पर सहमति होने के बावजूद आदेश जारी नहीं हुए। इससे दोनों नेताओं के बीच अविश्वास और बढ़ गया।

मार्च 2020 में गिर गई थी कमलनाथ सरकार

मध्य प्रदेश में 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने सरकार बनाई थी और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे। मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। उनके समर्थक विधायकों के इस्तीफों के बाद कमलनाथ सरकार बहुमत के संकट में आ गई और 20 मार्च 2020 को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी।

दिग्विजय सिंह का कहना है कि सरकार का पतन किसी वैचारिक टकराव से ज्यादा नेताओं के बीच व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और आपसी समन्वय की कमी का नतीजा था। हालांकि, सरकार गिरने की वजहों को लेकर उस समय से ही कांग्रेस नेताओं के बीच अलग-अलग बयान सामने आते रहे हैं।

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