नई दिल्ली। वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची संशोधन से जुड़े मामलों की सुनवाई और राहत को लेकर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि वह बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाकर थक चुके हैं और अब उन्हें अदालत से ज्यादा उम्मीद नहीं रह गई है। सिब्बल ने यह टिप्पणी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की।
‘संविधान बचाने की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट पर’
कपिल सिब्बल ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संविधान की रक्षा करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट की है, लेकिन बार-बार अदालत जाने के बावजूद राहत मिलने को लेकर उनके मन में संदेह है।
उन्होंने कहा, “मैं बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाकर थक गया हूं। मैं अपनी बात कह रहा हूं। मुझे नहीं लगता कि वहां जाने का कोई फायदा है। मुझे भारत के सुप्रीम कोर्ट से अब ज्यादा उम्मीद नहीं है।”
सिब्बल ने यह भी कहा कि वकीलों का काम लोगों के मामलों को अदालत के सामने रखना है। यदि अन्याय होता है तो अदालत में याचिका दाखिल करना उनकी जिम्मेदारी है, भले ही सुनवाई या राहत को लेकर अनिश्चितता बनी रहे।
मतदाता सूची से नाम हटाने पर उठाए सवाल
सिब्बल ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने और जोड़े जाने की आशंकाओं को सुप्रीम कोर्ट के सामने कई बार उठाया गया, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली।
उन्होंने अपीलीय ट्रिब्यूनल में सामने आए आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अब तक निपटाई गई अपीलों में लगभग 93 प्रतिशत मामलों में मतदाताओं के नाम बहाल किए गए हैं। सिब्बल के अनुसार, यह आंकड़ा मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हालांकि, 93 प्रतिशत का आंकड़ा निपटाई गई अपीलों से संबंधित है। इसे पश्चिम बंगाल के सभी हटाए गए मतदाताओं या पूरी मतदाता सूची के 93 प्रतिशत नाम गलत तरीके से हटाए जाने के रूप में नहीं समझना चाहिए।
CJI को लेकर क्या बोले सिब्बल?
जब सिब्बल से पूछा गया कि क्या वह भारत के मुख्य न्यायाधीश से असंतुष्ट हैं, तो उन्होंने कहा कि वकीलों के लिए संतुष्टि या असंतुष्टि का सवाल नहीं है। उनका काम लोगों के मामलों को लड़ना है और अन्याय होने पर कानूनी रास्ता अपनाना है।
सिब्बल की टिप्पणियों ने SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची में नामों के संशोधन और न्यायिक राहत को लेकर जारी बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलों के निपटारे में तेजी लाने के मुद्दे पर सुनवाई भी निर्धारित की है।