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इंदौर में रोज 3 करोड़ लीटर पानी का होगा दोबारा इस्तेमाल, 21.59 करोड़ से बनेगा नेटवर्क

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Deepak Sharma

15 Oct 2026 | 10:59 AM
इंदौर में रोज 3 करोड़ लीटर पानी का होगा दोबारा इस्तेमाल, 21.59 करोड़ से बनेगा नेटवर्क

इंदौर। कम बारिश के बीच आगामी गर्मियों में संभावित जलसंकट से निपटने के लिए इंदौर नगर निगम ने पानी के पुनः उपयोग की योजना पर जोर दिया है। शहर में सीवेज से निकले उपचारित पानी को बड़े पैमाने पर दोबारा इस्तेमाल करने की तैयारी है। इसके तहत चार स्थानों पर टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट लगाने और करीब 3 करोड़ लीटर प्रतिदिन उपचारित पानी उपलब्ध कराने की योजना प्रस्तावित है। वहीं, 21.59 करोड़ रुपये की ‘जल ही अमृत’ परियोजना के तहत उपचारित पानी के संग्रहण और वितरण का नेटवर्क विकसित किया जाएगा।

योजना का उद्देश्य उद्यानों की सिंचाई, सड़क धुलाई, निर्माण कार्य और धूल नियंत्रण जैसे कामों में पीने योग्य पानी की खपत घटाना है। इससे नर्मदा सहित अन्य ताजे जल स्रोतों पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

चार स्थानों पर लगेंगे टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट

नगर निगम की अर्बन चैलेंज फंड (UCF) परियोजना के तहत चार स्थानों पर टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव है। इनकी प्रस्तावित क्षमता इस प्रकार है:

  • सांवेर औद्योगिक क्षेत्र: 3 एमएलडी

  • कनाड़िया: 8 एमएलडी

  • टिगरिया बादशाह तालाब: 9 एमएलडी

  • कबीटखेड़ी एसटीपी परिसर: 10 एमएलडी

इन चारों प्लांटों की कुल क्षमता 30 एमएलडी होगी। एमएलडी यानी मिलियन लीटर प्रतिदिन के हिसाब से यह क्षमता रोज 3 करोड़ लीटर पानी के उपचार के बराबर है।

उपचारित पानी का इस्तेमाल उद्यानों की सिंचाई, सड़कों की धुलाई, निर्माण कार्यों, सीवर सफाई और धूल नियंत्रण में किया जा सकेगा। इसके अलावा सरकारी भवनों, अस्पतालों, एयरपोर्ट, मेट्रो और औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसकी आपूर्ति की संभावनाएं तलाशने की योजना है।

21.59 करोड़ रुपये से बनेगा वितरण नेटवर्क

‘जल ही अमृत’ परियोजना के तहत स्कीम नंबर 78 में 30 लाख लीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक और कबीटखेड़ी एसटीपी परिसर में 15 लाख लीटर क्षमता का ग्राउंड स्टोरेज रिजर्वायर प्रस्तावित है। इनके साथ पंपिंग व्यवस्था और वितरण पाइपलाइन भी विकसित की जाएगी। इन कार्यों की अनुमानित लागत जीएसटी सहित 21.59 करोड़ रुपये बताई गई है।

प्रस्तावित नेटवर्क से निपानिया, बॉम्बे हॉस्पिटल क्षेत्र, महालक्ष्मी नगर, देवास नाका और न्यू लोहा मंडी सहित चिन्हित क्षेत्रों तक उपचारित पानी पहुंचाने की योजना है। परियोजना दस्तावेज में नेटवर्क की डिजाइन लंबाई 41.36 किलोमीटर और विभिन्न चरणों में 29.27 किलोमीटर का उल्लेख है। दोनों आंकड़ों के कार्यवार विवरण और मौजूदा स्थिति की स्पष्टता के बाद ही परियोजना की वास्तविक प्रगति का आकलन किया जा सकेगा।

133 उद्यानों को मिलेगा उपचारित पानी

योजना के तहत कुल 133 उद्यानों को उपचारित पानी की आपूर्ति से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें 23 मौजूदा और 110 नए उद्यान शामिल हैं। इसके अलावा 30 हाइड्रेंट स्थापित करने का प्रस्ताव है।

उद्यानों की सिंचाई में उपचारित पानी का उपयोग बढ़ने से ताजे पानी की बचत हो सकती है। हालांकि, इसके लिए अलग पाइपलाइन, पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच और उपयोग के स्पष्ट मानक सुनिश्चित करना जरूरी होगा।

162 किलोमीटर से अधिक सीवर लाइन के पुनर्वास की योजना

नगर निगम शहर की सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 22 जोन में कुल 162.03 किलोमीटर सीवर लाइन के पुनर्वास या प्रतिस्थापन की योजना पर भी काम कर रहा है। इसकी अनुमानित लागत 165.88 करोड़ रुपये बताई गई है। प्रस्ताव में मुख्य रूप से 300 से 800 मिलीमीटर व्यास की सीवर लाइनें शामिल हैं।

सीवर लाइनों के सुधार से सीवेज के प्रवाह और उपचार संयंत्रों तक उसकी पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है। इससे सीवेज प्रबंधन और उपचारित पानी के पुनः उपयोग की व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

महापौर की बैठक में ड्रेनेज और सिंहस्थ-2028 की समीक्षा

महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में बुधवार को सिटी बस कार्यालय में अमृत प्रोजेक्ट और सीवरेज विभाग की समीक्षा बैठक हुई। इसमें जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा, पार्षद योगेश गेदर, अपर आयुक्त आशीष कुमार सहित विभागीय अधिकारी और इंजीनियर मौजूद रहे।

बैठक में ड्रेनेज परियोजनाओं की प्रगति, नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, वार्डवार ड्रेनेज टेंडर और मौजूदा एसटीपी के संचालन की समीक्षा की गई। कान्ह-सरस्वती नदी की सफाई, बिलावली और लिंबोदी तालाब से जुड़े एसटीपी मॉडल, तालाबों और बावड़ियों के निर्माण तथा सिंहस्थ-2028 की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। सिरपुर वेटलैंड और यशवंत सागर से जुड़े विषय भी समीक्षा के एजेंडे में शामिल रहे।

योजनाओं के समय पर पूरा होने की चुनौती

इंदौर में उपचारित पानी के पुनः उपयोग की योजना ताजे पानी की मांग कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ प्लांट और पाइपलाइन समय पर तैयार होने, पानी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप रहने और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होने पर निर्भर करेगा।

कम बारिश की स्थिति में केवल नई परियोजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं होगी। जल संग्रहण बढ़ाने, सीवरेज व्यवस्था सुधारने और उपचारित पानी के व्यवस्थित पुनः उपयोग को प्रभावी ढंग से लागू करना भी जरूरी होगा।

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