नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी जारी रहने के बावजूद व्यापार, रूस से तेल खरीद और आतंकवाद को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 30 सितंबर को फोन पर बातचीत की, जिसमें व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और उभरती तकनीकों समेत द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।
आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की चिंता
फोन वार्ता से एक दिन पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के रवैये को लेकर भारत की चिंता सार्वजनिक रूप से रखी। उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं को अमेरिका की ओर से पर्याप्त समझ या संवेदनशीलता नहीं मिलना द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करता है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और पाकिस्तान के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ा है।
टैरिफ और रूसी तेल बना बड़ा मुद्दा
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में भी तनाव बना हुआ है। अमेरिका के नए कानून के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भविष्य में भारी टैरिफ लगाए जाने की संभावना है, जिसमें भारत भी प्रभावित हो सकता है। भारत ने अमेरिका को बताया है कि ऐसे कदम द्विपक्षीय संबंधों पर असर डाल सकते हैं।
भारत का कहना है कि उसकी ऊर्जा खरीद का आधार राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और भरोसेमंद आपूर्ति है। वहीं दोनों देश प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखे हुए हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका के दौरे पर हैं और व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं।
संबंधों में सहयोग भी जारी
मतभेदों के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग जारी है। मोदी और ट्रंप की हालिया बातचीत में भी दोनों पक्षों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि भारत अब आतंकवाद, व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अपनी चिंताओं को अमेरिका के सामने अधिक स्पष्टता से रख रहा है, जबकि दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक सहयोग बनाए रखने की कोशिश भी जारी है।