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‘मुस्लिम महिलाओं को सबसे ज्यादा नुकसान’, हिमंत सरमा ने देशभर में UCC लागू करने की मांग दोहराई

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Deepak Sharma

19 Oct 2026 | 11:30 AM
‘मुस्लिम महिलाओं को सबसे ज्यादा नुकसान’, हिमंत सरमा ने देशभर में UCC लागू करने की मांग दोहराई

बस्ती। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने देशभर में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code–UCC) लागू करने की मांग दोहराते हुए कहा है कि इसके अभाव में मुस्लिम महिलाओं को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने बहुविवाह जैसी प्रथाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की जरूरत है।

सरमा रविवार को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरीश द्विवेदी के घर उनकी मां के निधन पर शोक व्यक्त करने पहुंचे थे। इसी दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने UCC को पूरे देश में लागू करने की वकालत की।

‘असम में लागू, अब पूरे देश में हो UCC’

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम में समान नागरिक संहिता को अधिसूचित किया जा चुका है और अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि UCC की जरूरत विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और बहुविवाह जैसे मुद्दों से निपटने के लिए है।

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर समान कानूनी प्रावधान लागू करना है। हालांकि, इसके स्वरूप, विभिन्न समुदायों की परंपराओं और धार्मिक स्वतंत्रता पर इसके प्रभाव को लेकर देश में बहस जारी है।

UCC को लेकर देश में तेज हुई बहस

भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से समान नागरिक संहिता की समर्थक रही है। उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम में भी UCC को लेकर विधायी कदम उठाए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सितंबर में कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा-नीत एनडीए शासित राज्यों में UCC लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।

वहीं, इस कानून के आलोचक इसके प्रावधानों, जनजातीय समुदायों को दी जाने वाली छूट और अलग-अलग धार्मिक एवं सामाजिक परंपराओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। समर्थकों का तर्क है कि समान नागरिक कानून से महिलाओं को समान अधिकार और कानूनी सुरक्षा मिल सकती है।

विपक्ष के प्रदर्शन पर भी बोले सरमा

सरमा ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सत्ता वोटों के माध्यम से मिलती है, दबाव या ताकत के इस्तेमाल से नहीं। उन्होंने बांग्लादेश और नेपाल का संदर्भ देते हुए सरकार बदलने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाने की राजनीति पर सवाल उठाए।

सरमा के बयान से एक बार फिर UCC को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर केंद्र और राज्यों की नीतियों के साथ-साथ महिलाओं के अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानूनों को लेकर चर्चा जारी रहने की संभावना है।

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