नई दिल्ली। त्योहारी सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ग्राहकों के बीच ई-कॉमर्स डिलीवरी पर 5 प्रतिशत GST लगाए जाने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि सरकार ने डिलीवरी सेवाओं पर नया टैक्स लगा दिया है। हालांकि, सरकार की फैक्ट चेक टीम ने इस दावे को गलत बताया है। सरकार के मुताबिक, यह नया टैक्स नहीं है, बल्कि कुछ ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं के लिए GST की दर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने का प्रावधान है।
सरकार ने क्या कहा?
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक टीम और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने स्पष्ट किया है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से दी जाने वाली निर्धारित डिलीवरी सेवाओं पर 5 प्रतिशत GST की दर लागू करने का प्रावधान GST काउंसिल की सिफारिशों के तहत किया गया है। इसका उद्देश्य कर व्यवस्था को अधिक स्पष्ट और एकसमान बनाना है।
किन सेवाओं पर लागू होगा 5% GST?
सरकारी जानकारी के अनुसार, ई-कॉमर्स ऑपरेटर के माध्यम से सामान की डिलीवरी से जुड़ी निर्धारित सेवाओं पर 5 प्रतिशत GST बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के लागू होगा। नियमों के तहत टैक्स जमा करने की जिम्मेदारी सेवा प्रदाता की स्थिति के अनुसार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म या संबंधित डिलीवरी सेवा प्रदाता की हो सकती है।
ग्राहकों को क्या समझना चाहिए?
सोशल मीडिया पर वायरल दावे के आधार पर यह मानना सही नहीं है कि सरकार ने त्योहारी सीजन में अचानक नया डिलीवरी टैक्स लगा दिया है। यह बदलाव निर्धारित ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं की GST व्यवस्था से जुड़ा है। हालांकि, इसका ग्राहकों के डिलीवरी शुल्क पर कितना असर पड़ेगा, यह संबंधित प्लेटफॉर्म की कीमतों और शुल्क निर्धारण पर निर्भर करेगा।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कर संबंधी जानकारी पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से उसकी पुष्टि करें।