चैतन्यलोक
संपादकीय

अनुशासन पर भारी है शासन…

Author

Deepak Sharma

13 Jul 2026 | 11:13 AM
अनुशासन पर भारी है शासन…

बड़ी अनुशासित कही जाती थी यह पार्टी ‘भाजपा’, उपचुनाव का टिकट न मिलने पर कैसा हंगामा मच रहा है, चक्काजाम, पथराव और जाने क्या-क्या..? दरअसल, ये नरोत्तम मिश्रा टिकट किस आधार पर मांग रहे हैं, जबकि ये पिछले चुनाव में पराजित हो गए थे। अभी चुनाव में ये जीत जाएंगे, इसकी क्या गारंटी है? लेकिन जिस उम्मीदवार को भाजपा ने टिकट दिया है उसको ये जीतने नहीं देंगे, यह पक्का है।

कोई भी जीते, कोई भी हारे, यहां मामला ये है कि किसी भी कीमत पर नरोत्तम मिश्रा को न तो टिकट देना था न उनको जीतने देना था, क्योंकि उस व्यक्ति का कद इतना ऊंचा है कि वह जीतते ही मंत्री पद की तरफ नहीं देखता, उसकी नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर होती। इसलिए भी उनका टिकट कट गया। वर्तमान में म.प्र. में मुख्यमंत्री मोहन यादव का कोई विकल्प आलाकमान को सूझ नहीं रहा है। सबके सब चले हुए छरे हैं। ऐसे में न तो मुख्यमंत्री चाहते हैं, न संगठन कि इस कद का नेता चुनाव लड़े और जीते।

यहां पार्टी का अनुशासन का मुद्दा शासन से हल्का हो गया है। वे दिन लद गए जब भाजपा में संगठन एवं आरएसएस के निर्णयों को सब चुपचाप मान लेते थे। हाल का घटनाक्रम भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण है। टिकट न मिलने पर कार्यकर्ताओं का क्रोध, इस्तीफे, तोड़फोड़, चक्काजाम ये दर्शा रहे हैं कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है। सबके सामने आकर नरोत्तम मिश्रा कार्यकर्ताओं से आग्रह कर रहे हैं कि वे शांति बनाए रखें, लेकिन क्रोध का ये उबाल थमने वाला नहीं है। मिश्रा भी जानते हैं कि पार्टी अब अपना निर्णय बदलने वाली नहीं है, लेकिन हिंसक आंदोलन के जरिए ये भी बता दिया है कि भाजपा उम्मीदवार की राह आसान नहीं है। वे भली-भांति जानते हैं कि उनका टिकट कटवाने में कौन लोग शामिल हैं और क्यों..?

टिप्पणियाँ (0)

टिप्पणी करने के लिए लॉग इन या रजिस्टर करें।

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!

होम वीडियो Sports श्रेणियाँ ई-पेपर