इस फैसले से मिस्र फुटबॉल संघ (EFA) आग बबूला हो गया और उसने फीफा से रेफरी को स्थायी रूप से हटाने की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। मिस्र के कोच होसाम हसन ने भी मैच के बाद टूर्नामेंट की निष्पक्षता पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनके खिलाड़ियों ने पूरी जान लगाई, लेकिन यह सब पैसे का खेल है और आयोजक चाहते हैं कि मेस्सी टूर्नामेंट में बने रहें।
आलोचना बनी टीम के लिए हथियार
दुनियाभर के मीडिया और विशेषज्ञों ने इस विवाद को और हवा दी है, सोशल मीडिया पर यह दावे तेजी से फैल रहे हैं कि फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और कॉर्पोरेट प्रायोजक व्यावसायिक फायदे के लिए मेस्सी की विरासत को बचाने में जुटे हैं।
लेकिन स्कालोनी ने बताया कि टीम इस बाहरी शोर को अपने खिलाफ नहीं बल्कि प्रेरणा के रूप में इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि आलोचनाओं और टिप्पणियों का इस्तेमाल टीम विद्रोह जगाने और खिलाड़ियों को और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने में किया जाता है।
VAR तकनीक पर जताया भरोसा
मैच फिक्सिंग की आशंकाओं को खारिज करते हुए स्कालोनी ने वीएआर तकनीक की निष्पक्षता का बचाव किया। उनका कहना था कि वीएआर की मौजूदगी में किसी टीम की मदद करना बेहद मुश्किल है, क्योंकि इसमें दोहरी व्याख्या की कोई गुंजाइश नहीं बचती। उन्होंने बताया कि विश्व कप शुरू होने से पहले दी गई ट्रेनिंग में सभी टीमों को साफ तौर पर नियम और फुटेज दिखाए गए थे, और अब तक उसी के अनुसार सब कुछ बिल्कुल तय नियमों के मुताबिक चल रहा है।