ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की पैरा एथलीट शर्मिला धनकर ने ऐसा इतिहास रचा, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। हरियाणा की 40 वर्षीय खिलाड़ी ने महिला शॉटपुट F57 स्पर्धा में 9.81 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स के पैरा एथलेटिक्स इतिहास का पहला स्वर्ण पदक मिला, जबकि लगभग दो दशक बाद इस खेल में भारत ने कोई पदक जीता है।
लेकिन शर्मिला की असली जीत केवल गोल्ड मेडल नहीं, बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों पर उनकी शानदार विजय है। बचपन में पोलियो के कारण एक पैर प्रभावित हुआ, युवावस्था में घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा और एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने जीवन से हार मानने तक का विचार किया। दो बच्चों की मां होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
34 वर्ष की उम्र में उन्होंने पैरा खेलों में कदम रखा। उनके दूसरे पति अजीत सिंह ने उन्हें खेलों के लिए प्रेरित किया और कोच टेक चंद के मार्गदर्शन में उन्होंने कुछ ही वर्षों में राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। 2021 में राष्ट्रीय चैंपियन बनने के बाद उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार किया और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण जीतकर देश का नाम रोशन किया।
शर्मिला ने प्रतियोगिता के छह में से सभी प्रयास 9 मीटर से अधिक फेंके, जबकि कोई अन्य खिलाड़ी इस दूरी तक नहीं पहुंच सकी। यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि उन लाखों महिलाओं के लिए उम्मीद का संदेश है जो कठिन परिस्थितियों से गुजर रही हैं।
शर्मिला धनकर की कहानी बताती है कि मजबूत इरादों, परिवार के सहयोग और निरंतर मेहनत से सबसे कठिन संघर्ष भी जीते जा सकते हैं। उनका यह स्वर्ण पदक भारतीय पैरा खेलों के इतिहास में प्रेरणा और साहस का नया अध्याय बन गया।